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ज़हूर के बाद

ज़हूर के बाद इमाम महदी अलैहिस्सलाम काबे की दीवार से टेक लगा कर खड़े होंगे। आपके सिर पर बादल का साया होगा। आसमान से आवाज़ आरही होगी यही इमाम महदी हैं। इसके बाद आप एक मिम्बर पर तशरीफ़ ले जायेंगे, लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलायेंगे और दीने हक़ की तरफ़ आने की हिदायत फ़रमायेंगे। आपकी सीरत पैग़म्बरे इस्लाम की सीरत होगी और आप उन्हीं के रास्ते पर चलेंगे। आप ख़ुत्बा दे रहे होंगे कि आसमान से ज़िब्राईल व मिकाईल आकर आपकी बैअत करेंगे। उनके बाद आम फ़रिश्ते आपकी बैअत करेंगे फिर आपके 313 साथी और जो मोमेनीन आपकी ख़िदमत में हाज़िर हो चुके होंगे आपकी बैअत करेंगे। बाद में आम बैअत का सिलसिला शुरू होगा। दस हज़ार अफ़राद की बैअत के बाद आप कूफ़े तशरीफ़ ले जायेंगे और अहलेबैत के दुशमनों का ख़ात्मा करेंगे। आपके हाथ में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का असा होगा जो अज़दहे का काम करेगा और बग़ल में तलवार लटकी होगी।

(ऐनुल हयात मजलिसी सफ़ा न. 92)

तारीख़ में है कि जब आप कूफ़े पहुँचेगे, तो कई हज़ार का एक गिरोह आपकी मुख़ालेफ़त में निकल पड़ेगा और कहेगा कि हमें बनी फ़ातिमा की ज़रूरत नही है, आप वापस जाइये। यह सुनकर आप तलवार से उन सब का क़िस्सा तमाम कर देंगे और किसी को भी ज़िन्दा नही छोड़ेंगे। जब कोई दुशमने आले मुहम्मद व मुनाफ़िक़ वहां बाक़ी नही रहेगा तो आप मिम्मबर पर तशरीफ़ ले जायेंगे और कर्बला के वाक़िये का ज़िक्र करेंगे। उस वक़्त लोग महवे गिरिया हो जायेंगे और की घंटो तक रोने का सिलसिला जारी रहेगा। इसके बाद आप हुक्म देंगे कि नहरे फ़रात को मशहदे हुसैन तक काट कर लाया जाये और एक ऐसी मस्जिद की तामीर की जाये जिसमें एक हज़ार दर हों। आपके हुक्म पर अमल किया जायेगा। इसके बाद आप सरवरे काएनात की ज़ियारत के लिए मदीन-ए- मुनव्वरा तशखरीफ़ ले जायेंगे।

(आलाम उल वरा, सफ़ा न.263 व इरशादे मुफ़ीद सफ़ा न. 532 व नूर उल अबसार सफ़ा न.155)

शाह रफ़ी उद्दीन मोहद्दिस लिखते है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम इल्मे लदुन्नी से शरसार होंगे। जब वह मक्के से ज़हूर फ़रमायेंगे और उनके ज़हूर की शोहरत आम होगी तो मदीने व मक्के की फ़ौजें आपकी ख़िदमत में पहुँच जायेंगी और इराक़ शाम व यमन के अबदाल और औलिया भी आपकी ख़िदमत में हाज़िर होगें और अरब की फ़ौज़ें जमा हो जायेंगी। आप काबे से बरामद होने वाले ख़ज़ाने से उनको माल देंगे। जिस जगह से यह माल बरामद होगा उसे ताजुले काबा कहते हैं। इसी दौरान एक खुरासानी बहुत बड़ी फ़ौज के साथ आपकी मदद के लिए मक्का -ए- मोज़्ज़मा को रवाना होगा। रास्ते में इस फौज के मकद्दमतुल जैश के कमान्डर मंसूर से नसरानी फ़ौज की टक्कर होगी और ख़ुरासानी लश्कर नसरानी फ़ौज को हरा कर हज़रत की ख़िदमत में पहुँच जायेगा।

इसके बाद बनी कल्ब से एक सुफ़यानी शख़्स हज़रत के मुक़ाबले के लिए एक अज़ीम लश्कर भेजेगा। लेकिन जब वह लश्कर मक्के और मदीने के बीच एक पहाड़ पर क़याम करेगा तो वहीं ज़मीन में धंस जायेगा। इसके बाद आले मुहम्मद का दुश्मन यह सुफ़यानी ईसाईयों से साज़ बाज़ करके एक बड़ी फौज तैयार करेगा। इस फ़ौज के अस्सी निशान होंगे और हर निशान के नीचे 12000 की फ़ौज होगी। उनका सैन्टर शाम होगा। हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम भी मदीने होते हुए जल्द से जल्द शाम पहुँचेंगे। जब आप दमिश्क में वारिद होंगे तो दुश्मने आले मुहम्मद, सुफ़यानी व ईसाई आपसे मुक़ाबले के लिए खड़े हो जायेंगे। इस जंग में दोनों तरफ़ से बहुत से लोग क़त्ल होंगे और आख़िर में इमाम को फ़तेह हासिल होगी। इसके बाद एक भी ईसाई शाम में बाक़ी न रहेगा। इमाम अपने सिपाहियों को ईनाम तक़सीम करेंगे और उन मुसलमानों को मदीने से वापस बुलायेंगे जो ईसाई बादशाह के ज़ुल्म से परेशान हो कर मदीने चले गये थे।

(क़ियामत नमा , सफ़ान. 4)

इसके बाद आप मक्क -ए- मोज़्ज़मा तशरीफ़ ले जायेंगे और मस्जिदे सहला में क़याम करेंगे।

(इरशाद सफ़ा न. 533)

मस्जिदुल हराम की अज़ सरे नो तामीर करायेंगे और दुनिया की तमाम मस्जिदों को शरई उसूल पर कर देंगे। तमाम बिदअतों का ख़ात्मा होगा और सुन्नत क़ायम होगी। दुनिया का निज़ाम सही करेंगे और हर शहर में फ़ौज भेजेंगे। इन्तेज़ाम का काम आपके वज़ीरों के हाथ में होगा।

(आलाम उल वरा सफ़ा न. 262 व 264)

इसके बाद आप सच्चे मोमिनों और काफ़िरों को ज़िंदा करेंगे, इस ज़िंदगी का मक़सद यह होगा ताकि मोमिन इस्लाम की शान देख कर ख़ुश हों और काफ़िरों से बदला लिया जा सके। इन ज़िंदा किये जाने वालों में क़ाबील से लेकर उम्मते मुहम्मदिया के फ़राना तक सब ज़िंदा किये जायेंगे और उनके तमाम आमाल का बदला उन्हें दिया जायेगा। उन्होंने जो ज़ुल्म किये हैं वह उनका मज़ा चखेंगे। ग़रीबों, बेकसों और मज़लूमों पर जो ज़ुल्म हुए हैं उनकी सज़ा ज़ालिमों को दी जायेगी। सबसे पहले जिसे ज़िंदा किया जायेगा वह यज़ीद बिन मुआविया मलून होगा।