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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

मेहदी(अ) इमाम होंगें और ईसा मामूम

अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास बयान करते हैं कि रसूलल्लाह सल्लाहो अलैहे वा आलेहि वसल्लम ने बयान फ़रमाया: यक़ीनन मेरे बाद मेरे ख़ुलाफ़ा और मेरे अवसिया मख़लूक़ पर अल्लाह की जानिब से हुज्जतें बारह होगीं। जिनमें पहला मेरा भाई और आख़िरी मेरा फ़रज़न्द होगा। लोगों ने अर्ज़ की, या रसूलल्लाह आपका भाई कौन है ? हज़रत ने फ़रमाया: अली इब्ने अबी तालिब।

सवाल किया गया कि आपका फ़रज़न्द कौन है ? मेरा फ़रज़न्द वह मेहदी है जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। उस ज़ाते पाक की क़सम जिसने मुझे हक़ के साथ बशारत देने वाला मबऊस फ़रमाया अगर दुनिया सिर्फ़ एक दिन भी बाक़ी रह जायेगी तो ख़ुदावन्द उस दिन को इस क़दर तूलानी कर देगा कि मेरा फ़रज़न्द ज़हूर करे और रूहूल्लाह ईसा इब्ने मरियम नाज़िल होगें। और मेहदी की इमामत में नमाज़ अदा करेगें। मेहदी के नूर से ज़मीन रौशन हो जायेगी। और उसकी हुकुमत मशरिक़ व मग़रिब पर मुहीत होगी।

मेहदी(अ) रसूलल्लाह(स) के हमराह जन्नत में

मदीने के एक यहूदी ने अमीरूल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब(अ) से बाज़ सवालात किये:

1- (ऐ अली)मुझे बताईये कि इस उम्मत के नबी(स) के बाद कितने इमाम होगें ?

2- मुझे बताईये कि जन्नत में मुहम्मद(स) का दर्जा कहाँ है ? और यह भी बताईये कि मुहम्मद(स) के साथ और कौन होगा ?

हज़रत अली(अ) ने फ़रमाया: इस उम्मत में नबी(स) के बाद बारह आईम्मा होगें। लोगों की मुख़ालेफ़त जिनको कुछ नुक़सान न पहुचा सकेगी।

यहूदी ने कहा: आपने बिल्कुल सही फ़रमाया।

हज़रत ने फिर फ़रमाया: मुहम्मद(स) का मक़ाम जन्नते अदन है। उसका बालाई हिस्सा परवरदिगार के अर्श से क़रीब होगा।

यहूदी ने अर्ज़ की " आपने सही फ़रमाया "

हज़रत अली(अ) ने फिर फ़रमाया: जन्नत में मुहम्मद(स) के हमराह बारह इमाम होगें जिनका अव्वल मैं हूँ और आख़िरी क़ायम अलमेहदी(अ) हैं।

यहूदी ने अर्ज़ की: आपने सच फ़रमाया।(किताब यनाबीऊल मवद्दत)

किफ़ायतुल असर में अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की है, वह बयान करते हैं मैने रसूलल्लाह(स) को फ़रमाते सुना: मेरे अहले बैत अहले ज़मीन के लिये उसी तरह अमान हैं जिस तरह आसमान वालों के लिये सितारे।

लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह(स) आपके बाद आईम्मा आपके अहलेबैत से होगें ? हज़रत ने फ़रमाया: हाँ मेरे बाद बारह इमाम होगें जिनमें से नौ हुसैन की सुल्ब से अमीन और मासूम होगें और इस उम्मत में मेहदी हम ही में से होगा।(आगाह रहो) यह सबके सब मेरे अहले बैत और औलाद से मेरे गोश्त और ख़ून होगें। उन क़ौमों का क्या हश्र होगा जो मेरी ज़ुरिय्यत व अहलेबैत के ज़रीये मुझे अज़ीय्यत देगें। ख़ुदावन्दे आलम ऐसे लोगो को मेरी शिफ़ाअत न पहुचायेगा।

हदीसुल मुनाशिदा

हाफ़िज़ अलक़न्दूज़ी हदीसे मुनाशिदा की रसूलल्लाह(स) के असहाब से रिवायत करते हैं। वह बयान करते हैं कि जिस वक़्त ................. आयत नाज़िल हुई तो हुज़ूर(स) ने फ़रमाया अल्लाहो अकबर दीन कामिल हो गया। नेमतें तमाम हो गयीं और मेरा परवरदिगार मेरी रिसालत और मेरे बाद अली(अ) की विलायत से राज़ी हो गया। लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह यह आयतें अली(अ) से मख़सूस हैं ? हज़रत ने फ़रमाया हाँ यह आयतें अली और क़यामत तक आने वाले मेरे अवसिया से मख़सूस हैं। लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह हमारे लिये बयान फ़रमायें हज़रत ने बयान फ़रमाया अली(अ) मेरा भाई और मेरा वारिस व वसी और मेरे बाद तमाम मोमीनीन का वली है। फिर मेरा फ़रज़न्द हसन, फिर हुसैन उनके बाद नौ हुसैन के फ़रज़न्द होगें। क़ुरआन उनके साथ है, यह क़ुरआन के साथ हैं। न यह क़ुरआन से जुदा होगें और न क़ुरआन उनसे जुदा होगा। यहाँ तक कि यह सब के सब मेरे पास हौज़े (कौसर) पर वारिद होगें।(यहाँ तक कि हुज़ूर(स) ने फ़रमाया) मैं तुम्हे ख़ुदा की क़सम दे कर सवाल करता हूँ। क्या तुम जानते हो कि ख़ुदा वन्दे आलम ने सूरये हज में इरशाद फ़रमाया है:...............................................................................ऐ ईमान वालो ऱूकू व सुजूद बजा लाओ(यानी नमाज़ पढो) और सिर्फ़ अपने परवरदिगारे हक़ीक़ी की इबादत करो और नेकी करो। [1]

सलमान ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह वह कौन लोग हैं जिनके (आमाल व अफ़आल) पर आपको गवाह बनाया गया है और उनको दूसरे लोगों( के आमाल व अफ़आल पर) गवाह मुक़र्रर किया गय है, जिनको ख़ुदावन्दे आलम ने मुनतख़ब किया है और मिल्लते इबराहीम से उन पर दीन( के मुआमलात) में किसी क़िस्म की तंगी(सख्ती) को रवा नही रखा है ? आँ हज़रत ने फ़रमाया: इस अम्र से सिर्फ़ 13 हज़रात मूराद हैं। सलमान ने अर्ज़ की(या रसूलल्लाह) इरशाद फ़रमाईये ? फ़रमाया मैं और मेरे भाई और मेरे 11 फ़रज़न्द हैं।

इमाम हम्बल बयान करते हैं: रसूलल्लाह(स) ने हुसैन(अ) के लिये फ़रमाया: मेरा यह फ़रज़न्द इमाम है, इमाम का भाई और 9 इमामों का वालिद है जिनका 9वा क़ाइम(अ) है।(मुस्नद अहमद बिन हम्बल)

नासल रसूलल्लाह से सवाल करते हैं: इब्ने अब्बास का बयान है कि नासल यहूदी पैग़म्बरे इस्लाम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज़ की ऐ मुहम्मद मैं आप से कुछ ऐसी जीज़ों के मुतअल्लिक़ सवाल करना चाहता हूँ जो एक ज़माने से मेरे सपने में ख़लिश बनी हुई हैं।हज़रत ने फ़रमाया बयान करो: उसने कहा " आप मुझे अपने वसी के बारे में बतालाएँ ? इसलिये कि कोई नबी ऐसा नही गुज़रा जिसका वसी न हो। हमारे नबी मूसा बिन इमरान ने यूशा बिन नून को अपना वसी मुक़र्रर किया।

हज़रत ने फ़रमाया: मेरी वसी अली बिन अबी तालिब है और उसके बाद मेरे दो नवासे हसन और हुसैन होगें।(फिर) 9 आईम्मा (यके बाद दीगर) हुसैन की औलाद से होगें।

नासल ने कहा: आप मुझे उनके नाम बताईये। हज़रत ने फ़रमाया: हुसैन के बाद उनका फ़रज़न्द अली होगा और उनके बाद उनकी फ़रज़न्द मुहम्मद होगा और उनके बाद उनका फ़रज़न्द जाफ़र होगा। उनके बाद उनका फ़रज़न्द मूसा फिर उनका फ़रज़न्द अली होगा फिर उनका फ़रज़न्द मुहम्मद होगा फिर उनका फ़रज़न्द अली होगा फिर उनका फ़रज़न्द हसन होगा फिर उनका फ़रज़न्द हुज्जत मुहम्मद मेहदी होगा जो कि बारह हैं। [2]

मेहदी(अ) का ज़हूर यक़ीनी है

मुहम्मद बिन अली अततिरमीज़ी अपनी सहीय में आँ हज़रत(स) से रिवायत करते हैं, हज़रत ने फ़रमाया: ................यानी दुनिया फ़ना नही होगी यहा तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स तमाम अरब पर हुकुमत करेगा जिस का नाम मेरे नाम पर होगा।

इमाम हम्बल बयान करते हैं रसूलल्लाह ने फ़रमाया ज़माना बाक़ी रहेगा यहा तक कि मेरे अहलेबैत में से एक शख़्स तमाम अरब का मालिक क़रार पायेगा। उसका नाम मेरे नाम पर होगा। [3]

सहीय तिरमीज़ी में रसूललल्लाह(स) से इस तरह रिवायत की गयी है कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा।

अहमद अपनी मुस्नद में आँ हज़रत से रिवायत करते हैं कि हुज़ूर(स) ने फ़रमाया कि क़यामत में उस वक़्त तक नही आयेगी जब तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर न हो जाये। उसका नाम मेरे नाम पर होगा।

अबी सईद ख़िदरी से रिवायत की गया है वह बयान करते हैं हमें नबी ए करीम(स) के बाद हादेसा वाक़े हो जाने का ख़ौफ़ दामनगीर था, चुनान्चे हमने हज़रत से सवाल किया आपने फ़रमाया मेरी उम्मत से मेहदी ज़हूर करेगा जो पाँच या सात या नौ साल तक ज़िन्दगी गुज़ारेगा। [4]

अबु दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत करते हैं हुज़ूर ने फ़रमाया: अगर ज़माना एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा यक़ीनन ख़ुदावन्दे आलम मेरे अहलेबैत से एक शख़्स को ज़ाहिर करेगा जो दुनिया को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। जिस तरह से वह उससे पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।(सहीय अबी दाऊद)

अबू दाऊद पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत करते हैं हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहा तक कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स तमाम अरब का हाकिम क़रार पायेगा। उसका नाम मेरे नाम पर होगा।(अबू दाऊद का का बयान दूसरी हदीस में इस तरह है) जो कि ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

मेहदी फ़रज़न्दे फ़ातिमा ज़हरा हैं।

अबू दाऊद उम्मे सलमा से रिवायत करते हैं, उम्मे सलमा फ़रमाती हैं कि मैने रसूलल्लाह(स) को फ़रमाते सुना:..............................................

मेहदी मेरी औलाद से फ़ातिमा का फ़रज़न्द है।(सहीय अबी दाऊद)

अबू दाऊद, अबी सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि आँ हज़रत ने फ़रमाया:.......................................................

(मेरा मेहदी बुलन्द पेशानी और बुलंद नाक वाला होगा। जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

सहीय बुख़ारी में अबू क़ुतादा अंसारी के ग़ुलाम नाफ़े से रिवायत की गयी है वह बयान करता है अबू हुरैरा ने बयान किया कि रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: उस वक़्त तुम क्या करोगे जबकि तुम्हारे दरमीयान इब्ने मरियम(हज़रते ईसा) नाज़िल होगें और तुम्हारा इमाम तुम लोगों में से होगा।

मेहदी(अ) अहले बैत से हैं।

सहीय इब्ने माजा में रसूलल्लाह(स) से रिवायत की गयी है कि हुज़ूर ने फ़रमाया: मेहदी अहलेबैत से होगा(जिसके ज़रीये) ख़ुदावंदे आलम एक ही रात में इसलाह फ़रमायेगा।

सहीय इब्ने माजा: में अनस इब्ने मालिक से रिवायत की गयी है कि मालिक बयान करता है कि मैने रसूलल्लाह(स) को फ़रमाते सुना हज़रत ने फ़रमाया: औलादे अब्दिल मुत्तलिब में से मैं और हमज़ा व अली व जाफ़र, हसन व हुसैन और मेहदी जन्नत वालों के सरदार हैं।

मुस्नदे अहमद बिन हम्बल:

में अबू सईद से रिवायत की गयी है वह बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया:(जब) ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी फिर मेरी औलाद से एक शख़्स ज़हूर करेगा जो 7 या 9 साल हुकुमत करेगा। और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा।

मेहदी(अ) आख़री ज़माने में आयेगें।

हाकिम नैशापुरी की मुसतदरक अलस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गयी है उनका बयान है कि पैग़म्बरे इस्लाम(स) ने फ़रमाया आख़िरी ज़माने में मेरी उम्मत पर उनके बादशाहों की जानिब से ऐसी शदीद मुसीबतें नाज़िल होगीं जिससे क़ब्ल उससे ज़्यादा शदीद मुसीबत कभी न सुनी होगी।यहाँ तक कि ज़मीन उन पर तंग हो जायेगी और ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी। मोमिन के लिये ज़ुल्म से महफ़ूज़ रहने के लिये कोई पनागाह न होगी। पस ख़ुदावंदे आलम मेरे अहले बैत से एक शख़्स को भेजेगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। अहले आसमान और अहले ज़मीन उससे ख़ुश होगें। ज़मीन अपने अनाज के दाने ज़खीरे न करेगी मगर उनके लिये निकाल देगी। और आसमान भी बारिश के क़तरात न रोकेगा मगर ख़ुदावंदे आलम उन पर मूसलाधार पानी बरसायेगा। मेहदी उन लोगों के दरमियान 7 या 8 या 9 साल ज़िन्दगी गुज़ारेगा उस ज़माने में ख़ुदा वंदे आलम की ख़ैर व बरकत देखकर मुर्दा लोग ज़िन्दगी की ख़्वाहिश करेंगें।

मुसतदरके अहमद में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गयी रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: मैं तुम लोगों को मेहदी की बशारत देता हूँ जो मेरी उम्मत से है। लोगों के इख़्तेलाफ़ और ज़लज़लों के ज़माने में ज़ाहिर होगा। पस वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। ज़मीन व आसमान में बसने वाले उससे राज़ी होगें। लोगों के दरमियान माल को हिस्सों में तक़सीम करेगा। एक शख़्स ने सवाल किया सहाहन क्या है ? आपने फ़रमाया: (यानी) लोगों के दरमियान माल को(सही तरीक़े से या) मसावात व बराबरी के साथ तक़सीम करेगा। हज़रत(स) ने फ़रमाया और ख़ुदावंदे आलम मुहम्मद(स) की उम्मत के दिलों को तवंगरी से भर देगा।

कुनुज़ुल हक़ाइक़ में अल्लामा मनावी रिवायत करते हैं आँ हज़रत(स) मे फ़रमाया: मेहदी जन्नत वालों के ताऊस हैं। [5]

जामेऊस सग़ीर में हाफ़िज़ सुयुती(शाफ़ेई) रिवायत करते हैं हज़रत ने फ़रमाया: मेहदी मेरी औलाद से होगा जिसकी पेशानी चमकते सितारे की तरह होगी।

मुसनदे अहमद बिन हम्बल में इमाम अबू सईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: उस वक़्त तक क़यामत नही आयेगी जब तक मेरे अहले बैत से एक शख़्स मेरी उम्मत में ज़ाहिर होगा(और) ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।(और) 7 साल हुकुमत करेगा।

अलमुसतदरक अलस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गयी है कि रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: क़यामत नही आयेगी यहा तक कि ज़मीन ज़ुल्म व जौर से और सरकशी से भर जायेगी फिर मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा(और) उसको अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

यनाबीउल मवद्दत में क़तादा से रिवायत की गयी है, क़तादा बयान करते हैं मैने सईद इब्ने मुसय्यब से पूछा कि क्या मेहदी का ज़हूर हक़ है ? उसने जवाब दिया हाँ, मेहदी औलादे फ़ातिमा(अ) से बरहक़ हैं। पस मैने कहा मेहदी फ़ातिमा की कौन औलाद हैं, जवाब मिला कि तुम्हारे लिये सिर्फ़ इतना काफ़ी है।

मेहदी(अ) का मुनकिर काफ़िर है।

हाफ़िज़ क़न्दोज़ी हनफ़ी यनाबीउल मवद्दत में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी से रिवायत करते हैं कि रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: जिस ने मेहदी के ख़ुरूज से इँकार किया उसने (मुहम्मद और ईसा) पर नाज़िल शुदा उमूर का इँकार किया और जिसने दज्जाल के ख़ुरूज का इंकार किया उसने भी कुफ़्र किया। [6]

यनाबीउल मवद्दत में होज़ैफ़ा ए यमान से रिवायत की गयी है होज़ैफ़ा बयान करते हैं मैने रसूलल्लाह(स) को फ़रमाते सुना: आपने फ़रमाया इस उम्मत के ज़ालिमों पर वाए हो कि वह किस तरह मुसलमानों को क़त्ल करेगें और उनको अपने वतनों से निकाल बाहर करेगें सिवाए उस शख़्स के जो उनकी बात माने और पैरवी करेगा पस मोमिन मुत्तक़ी उनके साथ ज़बानी तौर पर गुज़ारा करेगें और दिल से उनके साथ न होगें। लेकिन जब ख़ुदावंदे आलम इस्लाम को क़ुव्वत देना चाहेगा तो बर एक जाबिर व ज़ालिम को ख़त्म कर डालेगा क्यो कि वह हर चीज़ पर क़ादिर है। और वह उम्मत के फ़ासिद होने के बाद उसकी इसलाह फ़रमायेगा। ऐ होज़ैफ़ा अगर दुनिया से सिर्फ़ एक रोज़ बाक़ी रहेगा तो ख़ुदा उसको इतना तूलानी कर देगा यहा तक कि मेरे अहलेबैत से एक शख़्स हुकुमत करेगा और ख़ुदावंदे आलम अपने वादे के ख़िलाफ़ नही करता और वह अपने वादे पर क़ुदरत रखने वाला है।

मेहदी(अ) का ज़हूर क़यामत से पहले होगा

नूरुल अबसार में शबलख़ी मक़ातिल से और मुफ़स्सेरीन से अल्लाह तआला के इस क़ौल(..........) के बारे में रिवायत करते हैं कि इस आयत मेहदी(अ) मुराद हैं जो आख़िरी ज़माने में ज़ाहिर होगें। और उनके ज़हूर के बाद क़यामत की निशानियाँ ज़ाहिर होगीं और क़यामत आयेगी।

सईद बिन जबीर अल्लाह के इस क़ौल(.......................) की तफ़सीर बयान करते हैं कि आयत में औलादे फ़ातिमा(अ) से मेहदी(अ) मुराद हैं।

ग़राएबुल क़ुरआन में आयत(.........................) के ज़िम्न में वारिद हुआ है(आँ हज़रत ने फ़रमाया) अगर दुनिया में सिर्फ़ एक रोज़ भी बाक़ी रहेगा। ख़ुदावंदे आलम उस दिन को इतनी तूलानी कर देगा यहा तक कि मेरी उम्मत का एक शख़्स ज़हूर करेगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा उसकी कुन्नियत मेरी कुन्नियत होगी ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

मेहदी(अ) रसूलल्लाह की औलाद से हैं

अलबयान अलकंजी(शाफ़ेई) में अबु सलमा बिन अब्दुल रहमान बिन औफ़ से और उसने अपने बाप से रिवायत की कि वह बयान करता है रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: ख़ुदावंदे आलम ज़रूर बिज़्ज़रूर मेरी इतरत से एक ऐसे शख़्स को मबऊस करेगा जिसके दाँत मुनासिब और मुरत्तब होगें, पेशानी कुशादा होगी। ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा और माल को बग़ैर हिसाब अता करेगा।

मेहदी(अ) इमाम हुसैन(अ) के फ़रज़न्द हैं

शरहे नहजुल बलाग़ा में इब्ने अबील हदीदे मोतज़ेली बयान करता है कि क़ाज़ीयुल कुज़ात में इस्माईल बिन ओबाद से इत्तेसाल के साथ अली बिन अबी तालिब(अ) से रिवायत की अली(अ) ने मेहदी का तज़किरा करते हुए फ़रमाया: हुसैन की औलाद से है जिसकी पेशानी कुशादा होगी, नाक बुलंद होगी, पेट बड़ा होगा, दाँत मुरत्तब होगें और दायें रूख़सार पर तिल होगा।

सहीय इब्ने माजा में अलक़मा के वास्ते से अब्दुल्लाह से रिवायत की गयी है कि हम रसूलल्लाह(स) की ख़िदमत में हाज़िर थे उस वक़्त बनी हाशिम का एक जवान वहाँ आया जैसे ही हज़रत की निगाह उस पर पड़ी आपकी आँख़ें अश्क आलूद हो गयीं और चेहरे का रंग मुतग़य्यर हो गया। मैने अर्ज़ की हुज़ूर आपका रंग क्यो मुतग़य्यर हो गया को हज़रत(स) ने फ़रमाया: हम अहले बैत के लिये ख़ुदावंदे आलम ने आख़िरत को दुनिया पर तरजीह दी है। और मेरे अहले बैत को अनक़रीब ज़ुल्म व सितम का सामना करना पड़ेगा। और उनको वतन से दूर किया यहाँ तक कि मशरिक़ की जानिब से एक गिरोह आयेगा और उनके साथ सियाह परचम होगें पस वह ख़ैर का सवाल करेगें लेकिन(वह ज़ालिम) कुछ न देगें पस वह गिरोह क़ेताल करेगा और उनकी नुसरत की जायेगी पस जो कुछ वह सवाल करेगें उनको देगें लेकिन वह गिरोह मंज़ूर न करेगा, यहाँ तक कि वह इस(अम्र) को मेरे अहलेबैत से एक शख़्स के सुपुर्द करे देगें। पस वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा। जिस तरह उन्होने उसे ज़ुल्म व जौर से पुर किया होगा। पस जो लोग वह ज़माना पायेगें उसके क़रीब आयेगें अगरचे उनको बर्फ़ पर ही क्यो न चलना पड़े।(और बुरहान में कहा गया है कि इससे मुराद मेहदी(अ) हैं।

ख़ुदावंदे आलम मेहदी(अ) के ज़रीये दीन कामिल फ़रमायेगा

बयानुल कुजी(शाफ़ेई) में अली बिन जोशब से रिवायत की है, अली बिन जोशब बयान करता है अली बिन अबी तालिब फ़रमाते हैं मैने रसूलल्लाह(स) से सवाल किया कि क्या आले मुहम्मद के मेहदी हम में से हैं या हमारे अलावा हैं, हज़रत ने फ़रमाया: ऐसा नही है बल्कि ख़ुदावंदे आलम हम अहले बैत के सबब दीन(इस्लाम) को इख़्तेताम तक पहुचाएगा। जिस तरह उसने हमारे ही नबी(स) के ज़रीये उसको कामयाब बनाया है। और हमारे ज़रीये लोग फ़ितने से महफ़ूज़ रहेगें। जिस तरह वह शिर्क से महफ़ूज़ रहे और हमारी मुहब्बत के सबब अदावत के बाद उनके दिलों में मेल मुहब्बत और भाईचारगी पैदा कर देगा। जिस तरह वह शिर्क की अदावत के बाद एक दूसरे के भाई क़रार पाये।

मुन्तख़ब कन्ज़ुल उम्माल:  आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: अगर दुनिया में सिर्फ़ एक रोज़ बाक़ी रह जायेगा ख़ुदा वंदे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा यहा तक कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स क़ुस्तुन्तुन्या और दैलम के पहाड़ों का हाकिम क़रार पायेगा। [7]

हाफ़िज़ अलक़न्दुज़ी अलहनफ़ी अबू सईद ख़िदरी से बतौरे मरफ़ूअ रिवायत करते हैं, हुज़ूर(स) में फ़रमाया:मेहदी हम अहले बैत से हैं(बुलंद सर का हामिल है) जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह भर देगा जिस तरह वह पहले ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

अलफ़ुसूलुल मुहिम्मा अल्लामा मालिकी बिन सबाग़- में अबू दाऊद और तिरमिज़ी अपनी (सुनन) में अब्दुल्लाह बिन मसऊद से(बतौरे मरफ़ूअ) रिवायत करते हैं, अब्दुल्लाह बिन मसऊद बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: अगर दुनिया से एक रोज़ भी बाक़ी रह जायेगा तो ख़ुदावंदे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा कि मेरे अहले बैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसका नाम मेरे नाम पर होगा। जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।

लकंजी(शाफ़ेई) अबूसईद ख़िदरी से रिवायत करते हैं वह रसूलल्लाह(स) से रिवा.त करते हैं हज़रत ने फ़रमाया: आख़री ज़माने में फ़ितनों का ज़हूर होगा।(जिसके दरमियान) मेहदी(अ) नामी एक शख़्स ज़ाहिर होगा जिसकी अता व बख़्शिश मुबारक होगी।

यनाबीउल मवद्दत में इब्ने अब्बास से रिवायत की गयी है, इब्ने अब्बास बयान करते हैं आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया : इस दीन की कामयाबी अली(अ) से हुई। अली(अ) की शहादत के बाद दीन में फ़साद बरपा हो गया जिसकी इसलाह फ़क़त मेहदी(अ) के ज़रीये होगी।

यनाबीउल मवद्दत में अली बिन अबी तालिब से रिवायत की गयी है हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहा तक कि मेरी उम्मत से एक शख़्स हुसैन(अ) के फ़रज़न्द से ज़ाहिर होगा(और) ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।

हाशिया: हदीसे शरीफ़ा में बयान हुआ है कि इस दुनिया की कामयाबी अली बिन अबी तालिब(अ) के सबब हुई। मौजूदा हदीस में आँ हज़रत(स) ने उन कलेमात की इशारा फ़रमाया जो आपने अली बिन अबी तालिब की फ़ज़ीलत में इब्तेदाए इस्लाम में इरशाद फ़रमाये थे। मसलन:....................................................................... आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: इस्लाम अली बिन अबी तालिब की तलवार और ख़दीजा के माल से कामयाब हुआ।

............................................................................................... ख़ंदक़ के रोज़ अली की ज़रबत दोने जहान की इबादत से अफ़ज़ल है।.......................................... मैं और अली इस उम्मत के बाप हैं।

.................................................................. जिस वक़्त अली इब्ने अबी तालिब अम्र इब्ने अब्दवुद से जंग करने के लिये निकले तो आँ हज़रत ने फऱमाया: कुल्ले ईमान कुल्ले कुफ़्र के मुक़ाबले में जा रहा है।

हुज़ूर ने जंगे ख़ंदक़ के वक़्त दुआ करते हुए ख़ुदावंदे आलम के हुज़ूर में इस तरह फऱमाया:................................................... परवरदिगार अगर तू चाहता है कि तेरी इबादत न की जाये तो फिर तेरी इबादत कभी न होगी।(मुअल्लिफ़)

यनाबीउल मवद्दत में अली इब्ने अबी तालिब से रिवायत की गयी, हज़रत ने फ़रमाया: दुनिया ख़त्म न होगी यहा तक कि मेरी उम्मत से एक शख़्स हुसैन के फ़रज़न्द से ज़ाहिर होगा(और) ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह से वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

यनाबीउल मवद्दत में होज़ैफ़ा बिन यमान से रिवायत की गयी है होज़ैफ़ा बयान करते हैं हमसे रसूलल्लाह(स) ने ख़िताब करते हुए क़यामत तक होने वाले हालात की ख़बर दी और इस तरह इरशाद फ़रमाया: अगर दुनिया से सिर्फ़ एक रोज़ बाक़ी रह जायेगा। ख़ुदावंदे आलम उस रोज़ को इतना तूलानी कर देगा कि उसमे मेरी औलाद से एक शख़्स को मबऊस फ़रमायेगा जिसका नाम मेरा नाम पर होगा। सलमान ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह आप का वह कौन सा फ़रज़न्द होगा हुज़ूर ने इमाम हुसैन की जानिब इशारा करते हुए फ़रमाया: मेरा वह फ़रज़न्द इसकी औलाद से होगा।

यनाबीउल मवद्दत में क़ुर्रतुज़ ज़नी के वास्ते से रसूलल्लाह(स) से रिवायत की गयी हुज़ूर ने फ़रमाया: जिस वक़्त ज़मीन ज़ुल्म व जौर से भर जायेगी फिर मेरे अहलेबैत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा यहा तक कि वह ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भर चुकी होगी।

यनाबीउल मवद्दत में पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की गयी, हुज़ूर(स ने अली इब्ने अबी तालिब(अ) से फ़रमाया: ऐ अली लोगों के हसद से परहेज़ करना जो मेरी वफ़ात के बाद ज़ाहिर होगा। ऐसे लोगों पर ख़ुदावंदे आलम लानत करता है और लानत करने वाले लानत करते हैं।(पस गिरया करते हुए फ़रमाया) मुझे जिबरईल ने ख़बर दी है यह लोग अली पर मेरे बाद ज़ुल्म करेगें और यह ज़ुल्म क़ाइम के ज़हूर होने तक बाक़ी रहेगा। उन लोगों की मक्कारी व अय्यारी ऊरूज पर होगी और उम्मत उन की मुहब्बत पर जमा न होगी। उनकी शान कम होगी उनका इंकार करने वाला ज़लील होगा। उनकी तारीफ़ व मदह करने वालों का कसरत होगी। और यह उस वक़्त होगा जब शहर मुतग़य्यर हो जायेगें। बंदे कमज़ोर हो जायेगें और नाउम्मीदी बढ़ जायेगी। उस वक़्त मेरी औलाद से क़ायम अल मेहदी(अ) ज़हूर करेगा।

ख़ुदावंदे आलम उनकी तलवार के ज़रीये हक़ को ज़ाहिर फ़रमायेगा और लोग उसकी रग़बत और ख़ौफ़ से मुताबेअत करेगें। फिर हज़रत(अ) ने फ़रमाया:

'' ऐ लोगो, मैं तुमको बशारत देता हूँ ख़ुदा का वादा हक़ है, वह अपने वादे के(हरगिज़) नही करता। और उसका फ़ैसला कभी तबदील नही होता है इसलिये कि वह हकीम व ख़बीर है। यक़ीनन अल्लाह का तरफ़ से कामयाबी क़रीब है। परवरदिगार यह मेरे अहलेबैत हैं इन से हर तरह की कसाफ़त को दूर फ़रमा और उनकी नुसरत फ़रमा और उनको इज़्ज़त अता कर ज़िल्लत से महफ़ूज़ रख और मुझे उनके दरमियान बाक़ी रख इसलिये कि तू जो करना चाहता है उस पर क़ुदरत रखता है। ''

इब्ने असाकर की तारीख़े दमिश्क में ब रिवायते इब्ने अब्बास रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया: वह उम्मत किस तरह हलाक हो सकती है जिसकी इब्तेदा मैं हूँ और आख़िरी ईसा और दरमियानी मेहदी हों।

हाशिया: मज़कूरा हदीस में आँ हज़रत(स) ने इरशाद फ़रमाया: ईसा उम्मत के आख़िर में होगें। मुमकिन है हदीस का मतलब यह हो कि चुकि हज़रत ईसा(अ) मेहदी(अ) के ज़हूर के बाद आसमान से नाज़िल होगें पस इस तरह ईसा(अ) मेहदी(अ) से बाद में होगें लिहाज़ा यह कहना सही है कि अव्वल आँ हज़रत(स) हैं और वसत में मेहदी (अ) और ईसा(अ) आख़िरी हैं।

सुनने निसाई में

पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की है हुज़ूर ने फ़रमाया वह उम्मत कैसे हलाक हो सकती है जिसके अव्वल में  मैं हूँ, दरमियान में मेहदी(अ) हैं और ईसा(अ) आख़िरी  हैं।

यनाबीउल मवद्दत में अबू सईद ख़िदरी से रिवायत की गयी, वह बयान करते हैं मैं फ़ातिमा(अ) की ख़िदमत में उस वक़्त हाज़िर हुआ, जबकि पैग़म्बरे इस्लाम(स) बीमार थे। शहज़ादी ने रोते हुए अर्ज़ किया बाबा जान मैं आपके रूनुमा होने वाले(हालात) से डरती हूँ। हुज़ूर(स) ने इरशाद फ़रमाया: ऐ फ़ातिमा ख़ुदावंदे आलम ज़मीन वालों पर  नज़र की तो उसने तुम्हारे बाप को मुन्तख़ब किया और रसूल बनाया, फिर दूसरी मर्तबा नज़र की तो उसने तुम्हारे शौहर को मुन्तखब किया और मुझे हुक्म दिया कि मैं तुम्हारी शादी अली से कर दूँ पस मैने तुम्हारी शादी अली से की जो मुसलमानों के दरमियान बे एतबारे हिल्म बुज़ुर्ग हैं। इल्म में सबसे ज़्यादा हैं। और इस्लाम में सबसे मुक़द्दम है। (यहा तक हुज़ूर(स) ने फ़रमाया) इस उम्मत में मेरे दो नवासे(हसन व   हुसैन) तुम्हारे फ़रज़न्द हैं। और इस उम्मत में मेरा एक (फ़रज़ंद) मेहदी(अ) होगा।

अबू हारूने अबदी कहता है वहब इब्ने मनिया ने बयान किया है जब मूसा की इनकी क़ौम के ज़रीये आज़माइश हुई तो उनकी क़ौम ने बछड़े को अपना ख़ुदा क़रार दिया। यह अम्र मूसा पर बहुत गराँ गुज़रा। ख़ुदा वन्दे आलम ने फ़रमाया: ऐ मूसा तुम से क़ब्ल जितने भी अंबीया हुए उन सबकी आज़माइश उनकी क़ौम के ज़रीये हुई और मुहम्मद(स) के बाद उनकी क़ौम एक बड़ी आज़माईश में मुब्तला होगी। यहा तक कि वह एक दूसरे पर लानत करेगें। फिर ख़ुदावंदे आलम उनकी मुहम्मद(स) की औलाद से एक शख़्स से इसलाह फ़रमायेगा जिसका नाम मेहदी होगा।

इब्ने अब्दुल बर अपनी किताब अल इसतीआब फ़ी असमाइल असहाब में जाबिर सदफ़ी के वास्ते से पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत करते हैं आँ हज़रत ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से एक शख़्स ज़ाहिर होगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा।

यनाबीउल मवद्दत में अली इब्ने अबी तालिब(अ) से रिवायत की गयी है हज़रत ने फ़रमाया अनक़रीब ख़ुदावन्दे आलम ऐसी क़ौम को लायेगा जिन्हे ख़ुदा दोस्त रखता होगा और वह लोग भी ख़ुदा को दोस्त रखते होगें और ख़ुदा वंद उनमें से एक ग़रीब अजनबी को हुकुमत अता करेगा, पस वह मेहदी हैं जिनका चेहरा सुर्ख़ और बाल ज़र्द होगें। जो कि ज़मीन को बग़ैर किसी मशक़्क़त के अदल व इंसाफ़ से भर देगा। अपने वालेदैन से बचपने में जुदा हो जायेगें।(लोगों) के नज़दीक अज़ीज़ होगें। मुसलमानों  के शहरों पर अमन व अमान के साथ हुकुमत करेगें।लोग उनकी तवज्जोह से सुनेगें। जवान और बुढ़े इताअत करेगें। और ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से इस तरह से भर देगें जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी। उस वक़्त इमामत कामिल हो जायेगी। मेहदी की ख़िलाफ़त मुक़र्रर हो जायेगी और ख़ुदा लोगों को उनकी क़ब्रों से ज़िन्दा उठायेगा। ज़मीन आबाद हो जायेगी, और नहरें जारी होगीं, फ़ितना व ग़ारतगरी ख़त्म हो जायेगी और ख़ैर व बकरत में इज़ाफ़ा होगा।


………………………………………………………………… और नेकी करो ताकि तुम फ़लाह पा जाओ। और ख़ुदा की राह में जो जिहाद करने का हक़ हैं उस तरह जिहाद करो वही है जिसने तुमको अपने दीन की पैरवी के लिये मुन्तख़ब किया। और दीन के (मुआमलात में) तुम पर किसी तरह की तंगी(सख़्ती) रवा नही रखी, तुम अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर(हमेशा कारबंद),उसने तुम्हारा नाम(लक़्ब) मुसलमान रखा(उन किताबों में जो क़ुरआन से) पहले ही(नाज़िल हो चुकी हैं) और(ख़ुद) इस क़ुरआन में भी ताकि(हमारा) रसूल तुम्हारे (आमाल व अफ़आल) पर गवाही दे और तुम(दूसरे) लोगों (के आमाल व अफ़आल) पर गवाही दो तो(देखो) तुम लोग पाबंदी से नमाज़ पढ़ा करो और ज़कात दिया करो और ख़ुदा(के दीन) से मज़बूती के साथ मुतमस्सिक रहो वही तुम्हारा सरपरस्त है, सो वह कैसा अच्छा सरपरस्त और कैसा अच्छा मददगार है।

[2] - यनाबीऊल मवद्त, हाफ़िज़ अलक़न्दूज़ी
[3] - मुस्नदे अहमद बिन हम्बल
[4] - सहीय तिरमीज़ी
[5] - हदीसे शरीफ़ में मेहदी की तशबीह ताऊस(मोर) से देना ख़ूबसूरती और हुस्न व जमाल के सबब हो सकती है जिस तरह मोर का हुस्न व जमाल ज़मीन के परिंदों रे दरमियान बेनज़ीर है उसी तरह इमाम मेहदी की जमाल भी अहले जन्नत के दरमियान बेमिसाल है।(मोअल्लिफ़)
[6] - कुफ़्र के तीन दर्जे हैं:1- ख़ुदावंदे आलम की ज़ाते गिरामी का इंकार करना। 2- ख़ुदावंदे आलम की नाज़िल शुदा चीज़ों का इंकार करना। 3- नेमते ख़ुदावंदी का इंकार करना। हदीसे मज़कूरा में इसी कुफ़्र का बयान किया गया है। इस लिये इमाम मेहदी(अ) को ख़ुदा ने हक़ क़रार दिया है। मेहदी(अ) का इँकार करना रसूलल्लाह(स) के इंकार के मुतारादिफ़ है। इसलिये कि मेहदी(अ) के ज़हूर की ख़बर आँ हज़रत(स) ने दी है।(मुअल्लिफ़)
[7] - रिवायत में दैलम के पहाड़ से मुराद वह मक़ाम है जहा पर रसूलल्लाह(स) के ज़माने में यहूदीयों का मर्कज़ था और कुस्तुन्तुनया नसारा का मर्कज़ था। और बमुल्के जबलुद दैलम व कुस्तुन्तुनया से इमाम मेहदी(अ) का तमाम दुनिया और दीगर मज़ाहिब पर कामयाबी मुराद है।(मुअल्लिफ़)

पाँच अलामतें

मेहदी(अ.) के ज़हूर के बारे में अबू अब्दिल्लाह हुसैन इब्ने अली(अ.) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: मेहदी के ज़हूर की पाँच अलामतें हैं:

1-      सुफ़यानी का ख़ुरुज

2-      यमानी

3-      आसमान से आवाज़ आना।

4-      मक़ामे बैदा में तबाही।

5-      नफ़्से ज़कीय्या का क़त्ल होना। [1]

यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और  फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें¿  आपने इरशाद फ़रमाया: उस रोज़ अरब बहुत कम होगें, और सबके सब बैतुल मुक़द्दस में होगें। और उनका इमाम मेहदी(अ) होगा।

आख़री ज़माने में इमाम मेहदी की अलामत के बारे में अबी जाफ़र से रिवायत की गयी इमाम ने फ़रमाया: इमाम मेहदी रोज़े आशूरा ज़हूर फरमायेगें और यह वहीरोज़ है जिस दिन इमाम हुसैन(अ) शहीद हुए, दसवीं मुहर्रम थी और हफ़्ते का दिन था, मेहदी रुक्न व मक़ाम के दरमीयान खड़े होगें दाहिनी जानिब जिबरईल(अ) और बाँये जानिब मीकाईल होगें। ज़मीन के हर गोशे से आपके शिया बैअत के लिये जमा हो जायेगें। आपके शियों के लिये ज़मीन सिमट जायेगी। आप ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगें जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।

मेहदी(अ)के शियों के लिये ज़मीन की तनाबें सिमट जायेंगी। क़ुदरते ख़ुदा से ज़मीन के गोशे गोशे से लोग चंद लम्हात के अंदर मक्के में जमा हो जायेगें। [2]

हाकिम नैशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में अबू सईद ख़िदरी बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने इरशाद फऱमाया: मेरी उम्म्त के आख़री(ज़माने) में मेहदी ज़हूर करेगा। ख़ुदा वंदे आलम उसको बारिशों से सैराब फ़रमायेगा। और ज़मीन अपने नबातात को ज़ाहिर कर देगी, अमवाल की सहीह तक़सीम करेगा, जानवरों की कसरत होगी और उम्मते इस्लामिया साहिबे अज़मत होगी।

हाकिम नैशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की गयी है, हज़रत ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से मेहदी होगा, (जिस की हुकुमत) कम अज़ सात(साल) वर्ना नौ(साल) होगी। उसके ज़माने में मेरी उम्मत पर इस क़दर नेमतें नाज़िल होगीं जिस से कब्ल इस तरह नेमतों का नुज़ूल न हुआ होगा। ज़मीन खाने की तमाम चीज़ें अता करेगी जिसकी लोगों से ज़ख़ीरा अंदोज़ी न की जायेगी। उस रोज़ माल जमा होगा एक शख़्स खड़ा होगा और कहेगा इस माल को ले लो।

यनाबीउल मवद्दत में अबी ख़ालिद अलकाहिल ने इमाम जाफ़र सादिक़(अ) से अल्लाह तआला के इस क़ौल فَاسْتَبِقُواْ الْخَيْرَاتِ أَيْنَ مَا تَكُونُواْ يَأْتِ بِكُمُ اللّهُ جَمِيعًا (पस नेकीयों में जल्दी करो, तुम जहाँ भी होगे अल्लाह तुम सब को ले आयेगा।) की रिवायत की गयी है आपने फ़रमाया: आयत से क़ायम(अ) के असहाब मुराद हैं। जिनकी तादाद 313 होगी। ख़ुदा की क़सम उम्मते मअदूदह से यही लोग मुराद हैं यह सब लोग मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह एक लम्हे में जमा हो जायेगें।

यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल .................................................. के बारे में रिवायत बयान की गयी रावी बयान करता है उम्मते मअदूदह से मेहदी के असहाब मुराद हैं जो आख़री ज़माने में होगें जिनकी तादाद 313 होगी। जिस तरह बद्र में(रसूलल्लाह(स) के असहाब) का तादाद(313) थी, सबके सब एक लम्हे में ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह जमा हो जायेगें।

तारिख़े इब्ने असाकर(शाफ़ेई) में इस तरह रिवायत की गयी है जिस वक़्त क़ायमें आले मुहम्मद(अ) ज़हूर फ़रमायेगें पस ख़ुदा वंदे आलम मशरिक़ व मग़रिब वालों को इस तरह जमा फ़रमायेगा जिस तरह मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश होती है। चुनाँचे मेहदी के रोफ़क़ा अहले कूफ़ा से और अबदाल अहले शाम से होगें। [3]

यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल................................(समझ लो कि ख़ुदा ज़मीन को ज़िन्दा करता है बाद इसके कि उसकी मौत वाक़े हो चुकी हो।) के बारे में सलाम बिन मुसतनीर के वास्ते से इमाम बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: (ख़ुदावंदे आलम) क़ायम के सबब ज़मीन को ज़िन्दा फ़रमायेगा जो कि ज़ुल्म के सबब से मुर्दा हो चुकी होगी और आप अपने अदल के ज़रीये उसको ज़िन्दा फ़रमायेगें।

यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا  (और अहले किताब में यक़ीनन उस पर ईमान लायेगें अपनी मौत से क़ब्ल और क़यामत के दिन उन पर गवाह होगा।)(सूरह निसा आयत 159)

रावी बयान करता है क़यामत से क़ब्ल ईसा(अ) नाज़िल होगें, उस वक़्त यहूदी और ग़ैर यहूदी कोई बाक़ी न रहेगा मगर सबके सब अपने इन्तेक़ाल से क़ब्ल(मेहदी) पर ईमान ले आयेगें। और ईसा(अ) इमाम मेहदी(अ) की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।

तज़किरातुल ख़वास में सिब्ते इब्ने जौज़ी(अलहनफ़ी) बयान करता है कि सदयी बयान करता है कि मेहदी(अ) और ईसा(अ)(एक मक़ाम पर) जमा होगें। पस जब नमाज़ का वक़्त होगा, इमाम ईसा से फ़रमायेगें आप नमाज़ पढ़ायें लेकिन ईसा फ़रमायेंगें आप नमाज़ के लिये ज़्यादा बेहतर हैं पस ईसा इमाम मेहदी के साथ मामूम की हैसियत से नमाज़ पढ़ेंगें।

इमाम का क़िताल हक़ पर होगा।

सही मुस्लिम में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी बयान करते हैं कि मैंने आँ हज़रत(स) को फ़रमाते सुना: मेरी उम्मत का एक गिरोह इज़हारे हक़ के लिये क़यामत तक जंग करता रहेगा, पस ईसा(अ) तशरीफ़ लायेगें उनका हाकिम ईसा से कहेगा आईये हमें नमाज़ पढ़ाईये वह कहेंगें तुम में बअज़ बअज़ पर इस उम्मत की अता करदा बुज़ुर्गी के सबब हाकिम है। [4]

असआफ़ूर राग़ेबीन में सबान(अलहनफ़ी) बयान करता है कि बअज़ रिवायत में वारिद हुआ है कि इमाम के ज़हूर के वक़्त बुलंदी से एक फ़रिश्ता इस तरह आवाज़ देगा यह मेहदी ख़ुदा की ख़लीफ़ा है, पस तुम लोग इसकी पैरवी करो।   

 


 
[1] - रिवायत में नफ़्से ज़कीय्या से मुराद सैयदे हुसैनी है जो इमाम के ज़हूर से क़ब्ल ख़ुरुज करेगा। लोगों को हक़ का जानिब दावत देगा और इमाम के ज़हूर से क़ब्ल शहीद कर दिया जायेगा। (मुअल्लिफ़)
[2] - यह अम्र तअज्जुब ख़ेज़ नही है इसलिये कि ख़ुद क़ुरआने करीम ने जनाबे सुलैमान के वसी आसिफ़ बिन बरख़िया के लिये हज़ारों मील की मसाफ़त वाली ज़मीन की तनाबें सिमट गयीं थीं, और उन्होने एक लम्हे के अंदर फ़लस्तीन से यमन में तख़्ते बिलक़ीस मंगवा लिया था। इरशाद होता है: قَالَ الَّذِي عِندَهُ عِلْمٌ مِّنَ الْكِتَابِ أَنَا آتِيكَ بِهِ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ فَلَمَّا رَآهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُ

(सूरह नमल आयत 40)

[3] - हदीसे मज़कूर में मशरिक़ व मग़रिब वालों के जमा होने का मतलब यह है कि तमाम आलम यह देखेगा कि इमाम सारी दुनिया से ज़ुल्म व जौर का बदला ले रहे हैं और जब तमाम दुनिया पर यह रौशन और वाज़ेह हो जायेगा कि निजात आपके दामन से वाबस्ता है और उस वक़्त सारे लोग आप पर ईमान ले आयेगें।

हदीस में रोफ़क़ा ए इमाम से मुमकिन है आपके दरजा ए अव्वल के अंसार मुराद हों और इसी सबब से उन हज़रात को आपके रोफ़क़ा का नाम दिया गया हो।

अबदाल : लफ़्ज़े अबदाल ऐसे मुत्तक़ीन और सालेहीन लोगों से किनाया है जब भी उनमें से कोई ग़ायब होता है या इन्तेक़ाल करता है ख़ुदावंदे आलम उसका बदल दूसरे से शख़्स को क़रार देता है।

रिवायत में शाम जो वारिद हुआ है उससे मुराद मौजूदा शाम नही है बल्कि वह मुल्के शाम है जो सिरिया, लेबनान, फ़लिस्तीन, जार्डन और तर्की के बअज़ हिस्सों पर मुशतमिल है और यह भी मुमकिन है कि अबदाल(जबले आमिल) कि जहाँ पर सदरे इस्लाम से आज तक हक़ की हिमायत की जा रही है और हज़ारों ऊलामा, फ़ोक़ाहा और मुत्तक़ीन वहाँ पर पैदा हुए हैं यहाँ तक कि ऊलामा ए जबल आमिल की बअज़ शख़सियात के बारे में ख़ास कुतुब भी तहरीर फ़रमाई गयी है। जिनमें से बुज़ुर्ग आलिमे दीन शेख मुहम्मद अलहुर्र अलआमिली की किताब(अमलुल अमल फ़ी ऊलामा ए जबलिल आमिल) है, यही ऊलामा मुराद हैं।(मुअल्लिफ़) 

[4] - हदीसे मज़कूरा इस अम्र पर दलालत करती है कि इमाम मेहदी(अ) के ज़हूर तक ख़ुदा की तरफ़ दावत और दुनिया में हक़ पर जंग जारी रहेगी। औक यही हदीस उस गिरोहे मुसब्बीन के लिये जबाव भी है जिनका कहना है कि दुनिया का कुफ्र व ज़लालत से भर जाना ज़रूरी है ताकि इमाम ज़हूर फ़रमायें और हमें कुछ इसलाह नही करना चाहिये व गर्ना अमल इमाम के ज़हूर में ताख़ीर का बाईस होगा। इस क़िस्म का ख़्याल क़ायम करना कई वुजूह से ग़लत है, जिनमे से बअज़ का ज़िक्र हम कर चुके हैं।(मुअल्लिफ़)